गुरुवार, 14 जनवरी 2010

ਖਾਮੋਸ਼ੀ........

ਚੁਪ ਕੀਤੀ ਖਾਮੋਸ਼ੀ ਨੂੰ
ਮੈਂ ਇਕ ਦਿਨ ...
ਹੋਲੀ ਜੇਹੀ ਪੁਛਿਆ ...
ਦਸ ਤੂੰ ਇਤਨੀ ਮੋਣ ਕਿਓਂ ਰਹਨੀ ਆਂ ਭਲਾ .....?
ਓਹ ਕੁਝ ਨਾ ਬੋਲੀ
ਬਸ ਸੂਨੀ ਅਖਾਂ ਨਾਲ ਇਕ੍ਟਕ
ਮੇਰੇ ਵਲ ਤਕਦੀ ਰਹੀ ...


ਮੇਰੇ ਹਥ ਆਪਣੇ ਆਪ
ਉਸਦੇ ਨਮਨ ਨੂੰ ...
ਜੁੜ ਗਏ ਸੀ .....!!

5 टिप्‍पणियां:

  1. ਵਾਹ ਵਾਹ ਹੀਰ ਜੀ , ਚੁੱਪ ਨੂੰ ਚੁੱਪ ਚਾਪ ਖਾਮੋਸ਼ ਸਲਾਮ ... ਤੇ ਮੇਰੀ ਤੁਹਾਡੀ ਕਲਮ ਨੁੰ ਨਮਸ਼ਕਾਰ ਹੈ , ਤੁਹਾਨੂੰ ਨਮਸ਼ਕਾਰ ਹੈ ।

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  2. Harkirat Ji,
    Chhoti chhoti sahi per bahut changi lagi...
    Mainu kuchh yaad hai ek pankti
    TUNE TOH KUCHH NA KAHA TERI KHAMOSHI NE SAB KEH DIYA.....
    Surinder

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  3. सुन्ना राह
    सुन्नीयां गलीयां
    अंदर वी सुन्ना
    बाहर वी सुन्ना
    तुरदा हां सुन्ने राहां ते

    कंडियाले रुख
    कंडियाली धरती
    कंडियाला हवा दा वेग

    मैं ते मेरी चुप
    गल्लां करदे हां
    नां मैं किसे नूं सुणदां
    नां ही मैंनूं कोई सुणे

    चुप ने मेरे ज़ख्म कुरेदे ने
    हाले वी चुप हां
    ज़ख्मां चों लहू रिसदा है
    हाले वी चुप हां

    चुप ने ज़ख्मां ते लूण धूड़ैया
    हाले वी चुप हां
    जी करदा है मैं बोलां
    चुप बिणा कोई नहीं बुलौंदा

    चुप ने सीते ने मेरे बुल्ल

    मेरी रूह मौन हो गई है

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  4. सच कह रहा हूं हकीर ही आपकी ख़ामोशी सुनकर। मेरी चुप से भी रहा नहीं गया। 5-6 महीने पहले लिखी थी, दोबारा ताज़ा हो गई। बहुत-2 शुक्रिया मेरी रूह कंपाने के लिए।

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